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Sad Shayari

Rishey

मेरी जेब में जरा सा छेद क्या हो गया
सिक्के से ज्यादा तो रिश्ते गिर गए
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कुछ कह ना सके

हम उनसे मिले तो कुछ कह ना सके ऐ दोस्त,
ख़ुशी इतनी थी कि मुलाकात आँसू पोछते-पोछते ही निकल गयी...
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मुस्कुराने का हुनर

मुफ्त में नहीं सीखा उदासी में मुस्कुराने का हुनर,
बदले में ज़िंदगी की हर ख़ुशी तबाह की है...
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बात बदल देते हैं

रिश्तो को वक़्त और हालात बदल देते हैं
अब तेरा ज़िक्र होने पर हम बात बदल देते हैं
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ग़मों के आईने

ग़मों के आईने मैं झाँक कर तो देखो, तुम्हे भी ग़मों की लम्बी कतार नज़र आएगी |
कभी एक तो कभी दूसरा, बस येही होगा ग़मों का सिलसिला ||
By: Harshit Nirala

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